हेलीकॉप्टर का आविष्कार किसने किया था?

हेलीकॉप्टर आज के समय का एक ऐसा वाहन जिसने इंसान को हवा में यात्रा करने के काबिल बनाया है। हालांकि हवाई जहाज और विमान भी हमें हवा में उड़ाने के लिए सक्षम है। लेकिन हेलीकॉप्टर इन सबसे अलग है, क्योंकि इसमें कुछ खास प्रकार की विशेषताएँ होती है।
हेलीकॉप्टर पक्षीयों की तरह किसी भी दिशा में उड़ सकता है।

यह एक जगह हवा में खड़ा रह सकता है, जबकि विमान से ऐसा करना संभव नहीं है। विमान तो लगातार हवा में उड़ते रहते हैं, एक जगह खड़े रहने की विशेषता विमान में नहीं होती है।

इसके अलावा हेलीकॉप्टर पानी में भी उतर सकते हैं। प्रत्येक देश की वायुसेना हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करती है। क्योंकि इसके लिए किसी प्रकार के रन-वे की आवश्यकता नहीं होती है। इसको उतारने के लिए बस एक साफ, खुली और समतल जगह की आवश्यकता पड़ती है।

हेलीकॉप्टर इंसान का बनाया हुआ एक ऐसा यंत्र है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। तो आइए आज हम इंसान के बनाए हुए इस चमत्कार के इतिहास के बारे में पढ़ते हैं। तो हमारा आज का सवाल है हेलीकॉप्टर का आविष्कार किसने किया था? लेकिन इससे पहले हम हेलीकॉप्टर क्या है और यह कैसे काम करता है? के बारे में जानेंगे।

हेलीकॉप्टर क्या है?

Helicopter ka avishkar kisne kiya

हेलीकॉप्टर एक प्रकार का विमान है, लेकिन यह उड़ने के लिए ब्लेडस नामक पंखों का उपयोग करता है। यह पंख हेलीकॉप्टर के ऊपर की तरफ घूमते रहते है। एक हवाई जहाज की तुलना में हेलीकॉप्टर के पंख लगातार हवा में घूमते रहते है।

यह हवा से भारी होता है, लेकिन यह उड़ने के लिए एक शक्तिशाली इंजन का उपयोग करता है। इसका इंजन बहुत मजबूत होता है, जो आसमान में आने वाली प्रत्येक समस्या का सामना आसानी से कर लेता है। हेलीकॉप्टर के ऊपर लगे पंख जिस मजबूत छड़ी पर लगे होते है, उसे Rotor कहा जाता है।

हेलीकॉप्टर कैसे काम करता है?

किसी भी वस्तु को ऊपर उठाने के लिए एक बल की जरूरत होती है। जैसे हम किसी बहुमंजिला इमारत में लगी ‘लिफ्ट’ का इस्तेमाल किया जाता है। उसी प्रकार हेलीकॉप्टर में यह काम उसके पंख करते है। पंख की सहायता से हेलीकॉप्टर को ऊंचा उठाने के लिए Bernoulli Principle (बर्नौली सिद्धांत) का उपयोग किया जाता है।

इस सिद्धांत के अनुसार हवा की गति और दबाव आपस में संबधित होते है। हवा की गति बढ़ने पर दबाव कम हो जाता है और गति कम होने पर दबाव बढ़ जाता है। इस तरह से जब पंखों की सहायता से हवा की गति को बढ़ाया जाता है, तो उसका ऊपरी दबाव कम हो जाता है।

हेलीकॉप्टर में लगे पंख ऊपर की तरफ घुमावदार और नीचे की तरफ चपटे होते हैं। विज्ञान की भाषा में इस आकार को “एयरफॉइल” कहा जाता है। पंखों के इस आकार के कारण नीचे की तुलना में ऊपर हवा का प्रवाह तेज होने लगता है। नतिजन पंखों के ऊपर हवा का दबाव कम हो जाता है।

जिससे पंख ऊपर की तरफ उठने लगते हैं। हेलीकॉप्टर में Rotor Blade एक लिफ्ट का काम करते है। इस तरह से Rotor अपने ऊपर लगे Blades को घूमाकर हवा की गति को बढ़ाता है।

हेलीकॉप्टर का इतिहास

आज से लगभग 100 वर्ष पहले Paul Cornu ने हेलीकॉप्टर का आविष्कार किया था। लेकिन इसके इतिहास को समझने पर पता चलता है कि अन्य आविष्कारों की तरह इसके आविष्कार का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता।

साल 1907 में एक फ्रांसीसी व्यक्ति पॉल कोर्नू ने अपने एक डिजाइन से हेलीकॉप्टर का निर्माण किया था, अपनी पहली उड़ान के दौरान यह जमीन से लगभग 1 फूट की ऊंचाई तक उड़ा। इस दौरान इस हेलीकॉप्टर ने 20 सेकंड तक हवा में सफर किया।

बांस का हेलीकॉप्टर

हेलीकॉप्टर के इतिहास की शुरुआत चाइना के इतिहास से होती है। इसे जाने के लिए हमें इसके गहरे इतिहास में गोता लगाना होगा। चाइना में 400 ईसा पूर्व कुछ ऐसे खिलौने होते थे, जो बांस के बने थे। इन खिलौनों की सबसे खास बात यह थी कि यह हवा में उड़ सकते थे।
खिलौनों की बनावट की बात करें तो इसमें एक छड़ी पर दो पंख लगे होते थे।

जिसे बच्चे अपनी हथेली में रगड़कर ऊपर की तरफ छोड़ देते। इस तरह से वो खिलौना कुछ देर तक हवा में घूमने लगता था। आज मेलों में हमें प्लास्टिक के बने यह खिलौने देखने को मिल जाते हैं।

यह खिलौने आज के समय में मौजूद हेलीकॉप्टर जैसे थे। इसके अलावा चाइना में रहने वाले बच्चे पतंग भी उड़ाते थे, क्योंकि उनके यहाँ पतंग उड़ाने का धार्मिक महत्व होता था। इस तरह से चाइनीज लोगों द्वारा बनाया गया यह डिजाइन भविष्य के आविष्कारकों के लिए एक वरदान था।

Leonardo da Vinci’s के डिज़ाइन

आज से लगभग 600 वर्ष पूर्व विश्व के देशों में व्यापार तेजी से बढ़ने लगा, जिसके परिणामस्वरूप चीनी खिलौने यूरोप में पहुँचने लगे। एक दिन Leonardo da Vinci’s ने को इन खिलौनों का डिज़ाइन काफी पसंद आया और उन्होंने उसे एरियल स्क्रू नाम दिया और उसकी एक पेंटिंग बनाई।

Leonardo ने उस समय कहा कि अगर इस स्क्रू डिवाइस को अच्छे से बनाया जाए तो यह हवा में उड़ सकता है। जिसके लिए इसे लिनन के कपड़े से बनाना होगा, और इसके छिद्रों को स्टार्च से बंद करना होगा।

इसके बाद लियोनार्डो दा विंची ने उड़ने वाली मशीनों के कई डिज़ाइन तैयार किए, जिनमें ऑर्निथोप्टर मुख्य है। यह डिज़ाइन पक्षियों की उड़ान की नकल करता था। परंतु यह डिज़ाइन काफी गलत लग रहा था, क्योंकि एक या एक से अधिक इंसान को हवा में उठाने के लिए इसके पास इतनी शक्ति नहीं होगी। जबकि डिज़ाइन में 4 व्यक्तियों के हवा में उड़ने का चित्र दिखाया हुआ था।

मिखाइल लोमोनोसोव का प्रयोग

जुलाई 1754 में मिखाइल लोमोनोसोव (Mikhail Lomonosov) ने वायुगतिकीय उड़ान में एक और मिल का पत्थर साबित होने वाली खोज की। प्रसिद्ध रूसी वैज्ञानिक मिखाइल लोमोनोसोव ने हवा में मौसम संबधि उपकरणों को ऊपर उठाने के लिए एक मॉडल तैयार किया।

इस मॉडल में एक ही धूरी पर विपरीत दिशाओं में घूमने वाले दो प्रोपेलर (पंखे जैसा) का उपयोग किया गया था। फिर इसके ऊपर की तरफ समक्ष एक ऐसा ही प्रोपेलर बना हुआ था। इस तरह से लोमोनोसोव ने आधुनिक हेलीकॉप्टर के डिज़ाइन में एक कदम और बढ़ा दिया था|

1784 में लाउनॉय और बिएनवेनु (Launoy and Bienvenu) के प्रयोग

क्रिस्टियन डी लाउनॉय और उनके मैकेनिक बिएनवेनु ने हेलीकॉप्टर का coaxial मॉडल प्रस्तुत किया। इन्होंने यह मॉडल एक धनुष की सहायता से बनाया था। इन दोनों के इस प्रयोग के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

इसके लिए उन्होंने धनुष की रस्सी को घुमाकर उसे मोड़ा और फिर इस पर मशीन को रखकर उसे छोड़ दिया था। इससे वो खिलौना तेजी से घूमने लगता था। इसमें लग पंखों को इस तरह व्यवस्थित किया जाता था ताकि हवा से टकराने पर इनमें किसी प्रकार का कोई प्रभाव न पड़ें।

भाप से चलने वाले हेलीकॉप्टर

इसके बाद 1870 में एक छोटे खिलौने जैसे हेलीकॉप्टर को बनाया गया था, जो रबर बैंड से संचालित होता था। यह खिलौने आज से कुछ समय पहले बाजार में मिलते थे। लेकिन इनका डिज़ाइन इससे अलग होता था। 1861 में भाप से चलने वाले एक छोटे हेलीकॉप्टर का आविष्कार किया गया था। जो एल्युमिनियम से बना था, जिस कारण इसका हवा में उठना काफी मुश्किल था।

इस छोटे से हेलीकॉप्टर से प्रेरित होकर 1878 में भाप से चलने वाले एक और हेलीकॉप्टर का निर्माण किया गया। जो 39 फीट लंबा था और इसने कुछ सेकंड तक हवा में उड़कर एक नया रिकॉर्ड बनाया। हालांकि यह हेलीकॉप्टर मानवरहित था। इसने आज के हेलीकॉप्टर की तरह लम्बवत उड़ान भी भरी थी।

1887 में पेरिस में एक आविष्कारक ने सफलतापूर्वक इलैक्ट्रिक हेलीकॉप्टर का निर्माण किया और उसे हवा में कुछ देर के लिए उड़ाया था। इसके बाद जुलाई, 1901 में जर्मनी में एक हेलीकॉप्टर का आविष्कार किया गया था जिसने इन्सानों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाया।

हालांकि यह मशीन वक्त के साथ गायब हो गई। जिसके बारे में एक हॉलीवुड फिल्म में दिखाया गया है। यह आज के हेलीकॉप्टर की तरह एक मोटरचालित उड़ने वाली मशीन थी।

थॉमस एडिसन की रूचि

थॉमस एडिसन को भी हेलीकाप्टरों में काफी रूचि थी। 1880 के दशक के अंत में उन्होंने हेलीकॉप्टर पर प्रयोग करने के लिए काफी पैसे दिए थे। परंतु उन्होंने जिस विमान का आविष्कार किया, उसमें विस्फोट हो गया था। इस हादसे में एक कर्मचारी की जान जाती-जाती बची थी।

इस आविष्कार से प्रेरित होकर स्लोवाक आविष्कारक ने एडिसन के मॉडल में सुधार किया। इस मॉडल ने 1901 में 1.6 फीट हवा में और 1905 में इसने 4900 फीट की दूरी तक 13 फीट ऊंची उड़ान भरी। 1908 में एडिसन ने फिर से अपने हेलीकॉप्टर में सुधार करने की कोशिश की, लेकिन वो हेलीकॉप्टर कभी उड़ान नहीं भर पाया।

आज के आधुनिक हेलीकॉप्टर का आविष्कार

इस तरह से आप समझ सकते हैं कि हेलीकॉप्टर के आविष्कार में अलग-अलग व्यक्ति शामिल है। लेकिन इसकी पहली उड़ान का श्रेय मुख्यतः फ्रांसीसी लोगों को दिया जाता है। 1907 में Gyroplane No. 1 नामक हेलीकॉप्टर लोगों के सामने आया।

इसने पूरे 1 मिनट के लिए पायलट को हवा में उड़ाया था। इस तरह से यह पहली मानवयुक्त उड़ान थी। हालांकि इसमें कमियों के कारण यह हवा में गोते खा रहा था, लेकिन फिर भी इसमें पायलट की सुरक्षा के पूर्ण इंतजाम थे। इसमें बनी खामियों के कारण इसे सुरक्षित उड़ान नहीं माना गया था।

परंतु इसी वर्ष Paul Cornu ने एक ऐसे हेलीकॉप्टर का निर्माण किया जो कुल 20 सेकंड तक हवा में रहा और इसने पायलट समेत पूरी 1 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरी। इस तरह से Paul Cornu को हेलीकॉप्टर के आविष्कारक के रूप में जाना जाता है।

Paul Cornu के इस चमत्कार ने आविष्कारकों को एक नई दिशा प्रदान की। जिसके परिणामस्वरूप 1912 में एलेहैमर हेलीकॉप्टर का आविष्कार किया गया, परंतु परीक्षण के दौरान इसके रोटर पूरी तरह से नष्ट हो गए। लेकिन फिर भी 1916 तक इसमें सुधार करते हुए, लगातार परीक्षण जारी रहे।

फिर ऑस्ट्रीया और हंगरी ने मिलकर PKZ नाम का एक हेलीकॉप्टर बनाया। इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल प्रथम विश्व युद्ध में किया गया था। ऑस्ट्रीया और हंगरी के द्वारा बनाए गए इस यंत्र को PKZ हेलीकॉप्टर नाम दिया गया।

Prototypes Helicopters

साल 1912 के बाद इंजीनियरों और आविष्कारकों ने प्रोटोटाइपस हेलीकॉप्टर बनाने का निर्णय लिया। जिनका इस्तेमाल पहले और दूसरे विश्व युद्ध में किया गया था। लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका में, इगोर सिकोरस्की को हवाई यात्रा के इतिहास में पहला Mass Produced हेलीकॉप्टर बनाने का श्रेय दिया जाता है।

इगोर सिकोरस्की (Igor Sikorsky) के हेलीकॉप्टर

इगोर सिकोरस्की रूस में पैदा हुए अमेरिकी नागरिक थे, इन्होंने ही पहला Mass Produced हेलीकॉप्टर बनाया था। इस हेलीकॉप्टर को आर-4 के नाम से जाना गया। यह आज के आधुनिक हेलीकॉप्टर जैसा था। दरअसल उस समय इस तरह के 100 से ज्यादा हेलीकॉप्टर बनाए गए थे। इन हेलिकॉप्टरों ने द्वितीय विश्व युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

वास्तव में द्वितीय विश्व युद्ध के अंत तक सिकोरस्की ने इस तरह के 400 से भी अधिक हेलिकॉप्टर बनाए। जिसमें न केवल आर-4, बल्कि आर-5 और आर-6 भी शामिल थे। उन्होंने विशेष रूप से सेना के लिए अपने हेलीकॉप्टर बनाए, जो उन्हें ज्यादातर खोज और बचाव मिशन के लिए इस्तेमाल करते थे। आज सिकोरस्की को हेलीकॉप्टर के सबसे प्रसिद्ध डेवलपर्स में से एक माना जाता है।

दूसरे आविष्कारकों का सहयोग

इस फ्लाइंग मशीन में अन्य महत्वपूर्ण योगदानकर्ताओं का उल्लेख किए बिना हेलीकॉप्टर का इतिहास पूरा नहीं हो सकता। Arthur Young ने Model-30 हेलीकॉप्टर का निर्माण किया, जो Bell-47 का ही एक वर्जन था। यह हेलिकॉप्टर संयुक्त राज्य अमेरिका में नागरिकों के पर्सनल यूज होने वाला पहला हेलिकॉप्टर था।

चार्ल्स कामन ने K-225 का आविष्कार किया, जो दुनिया का पहला हेलीकॉप्टर था जिसमें दो टरबाइन इंजन थे। जबकि सुड एविएशन अलौएट-II एक सिंगल टरबाइन इंजन वाला पहला हेलीकॉप्टर था।

दरअसल, जिस विमान को हम आज हेलीकॉप्टर के रूप में जानते हैं। उसे विकसित करने में कई घटनाएं और कई दुर्घटनाएं हुईं। आज भी, हेलीकॉप्टरों के कई अलग-अलग डिज़ाइन हैं जिनका उपयोग विभिन्न सैन्य और नागरिक उपयोगों के लिए किया जा सकता है। हालांकि इन डिज़ाइनों को अभी तक व्यावहारिक रूप में उपयोग के लिए बनाया गया नहीं है।

यह आश्चर्यजनक है कि इतने कम समय में हेलीकॉप्टरों का विकास कितना आगे बढ़ चुका है। आधुनिक समय के हेलीकॉप्टर 1200 मील तक की दूरी तक उड़ सकते हैं। रफ्तार में यह 300 मील प्रति घंटे तक की गति पकड़ सकते हैं और 56 टन तक भार उठा सकते हैं।

पॉल कॉर्नू, एटियेन ओहमिचेन और थॉमस एडिसन जैसे शुरुआती हेलीकॉप्टर आविष्कारकों इस प्रगति पर काफी गर्व होगा। इस तरह पोल कॉर्नू ने हेलिकॉप्टर का आविष्कार किया था, जिसके लिए उनका नाम इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गया।

Conclusion:

तो दोस्तों ये था हेलीकाप्टर का आविष्कार किसने किया था, हम उम्मीद करते है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको हेलीकाप्टर के आविष्कार के बारे में पूरी जानकारी मिल गयी होगी|

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