पृथ्वी का निर्माण, जनम और विकास कैसे हुआ था?

पृथ्वी जो हमारा घर है, जिस पर हम अपना जीवन बिता रहे हैं। सदियों से हमारे इस घर ने अनेक प्राकृतिक आपदाओं को झेला है। लेकिन फिर भी धरती आज हम इन्सानों को जीवन दे रही है और हर खतरे से हमारी रक्षा कर रही है।

कहने को तो हमें हमारा यह घर काफी बड़ा लगता है, लेकिन ब्रह्मांड के सामने यह एक छोटे कण से भी अरब गुना छोटा है। ब्रह्मांड के सामने धरती के आकार की कल्पना आप ऐसे कर सकते है। जैसे सूर्य के सामने एक परमाणु का आकार।

दुनिया में हर वस्तु जिसका वजूद है, उसने कभी न कभी जन्म जरूर लिया है, चाहे वह कुछ भी हो। हमारी धरती का भी कभी जन्म हुआ था। हालाँकि यह घटना बहुत पहले घटी थी, इसलिए हम इसकी आयु का सटीक अनुमान नहीं लगा सकते।

परंतु कुछ वैज्ञानिक सिद्धांतों की मदद से इसे समझाया जा सकता है। जो काफी विसंगत है, किन्तु कुछ हद तक हमारे सवालों के जवाब देते हैं। तो आइए आज हम जानते है कि धरती का जन्म (निर्माण) कब और कैसे हुआ था?

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पृथ्वी का निर्माण और विकास कैसे हुआ था?

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1. सौरमंडल का निर्माण

पृथ्वी का इतिहास समझने के लिए हमें सबसे पहले सौरमंडल की उत्पत्ति के बारे में जानना होगा। जिसके लिए हमें आज से तकरीबन 5 अरब वर्ष पीछे जाना होगा।

वैज्ञानिक सिद्धांतो के अनुसार सौरमंडल का निर्माण सौर निहारिका (अंतरतारकीय धूल और गैस के कण) से हुआ। यह सौर निहारिकाएँ उस समय हमारी आकाशगंगा का चक्कर लगा रही थी।

सौरमंडल के निर्माण को समझने वाले मॉडल का नाम solar nebula hypothesis है। इस मॉडल के अनुसार सौरमंडल का निर्माण अंतरतारकीय धूल और गैस के एक बड़े, घूमने वाले बादल से हुआ। जिसे वैज्ञानिक भाषा में सौर निहारिका (solar nebula) कहते हैं।

यह सोलर नेब्यूला बिग बैंग (13.8 अरब वर्ष पहले) के तुरंत बाद बने हाइड्रोजन, हीलियम और भारी तत्वों से मिलकर बनी थी। आज से तकरीबन 4.5 अरब वर्ष पहले हमारी आकाशगंगा में एक सुपरनोवा विस्फोट हुआ। जिसने इस सोलर नेब्यूला पर भी अपना प्रभाव डाला।

इस विस्फोट से निकलने वाली shock wave से यह सोलर नेब्यूला सिकुड़ने लगी। इसके साथ ही दूसरी shock wave ने नेब्यूला को पूरी तरह rotate कर दिया।

धीरे-धीरे नेब्यूला की घूर्णन गति तेज होने लगी, जिसके परिणामस्वरूप angular momentum, gravity और inertia ने नेब्यूला को प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क में बदल दिया। जो पूरी तरह से समतल थी।

इतने बड़े बदलाव के कारण छोटे-छोटे कण एक साथ इकट्ठा होने लगे, जिससे बड़े-बड़े पिंड बनने लगे। इन पिंडों के कोणीय संवेग से नेब्यूला के केंद्र की परिक्रमा करते हुए किलोमीटर आकार के प्रोटोप्लैनेट बनने लगे। इस प्रक्रिया को होने में लाखों वर्ष लग गए।

नेब्यूला का सेंटर शक्तिशाली angular momentum न होने के कारण जल्दी ही ढह गया। इसके बाद जब तक हाइड्रोजन का हीलियम में परमाणु संलयन शुरू नहीं हुआ, तब तक संपीड़न इसे गर्म करता है।

2. सूर्य का निर्माण

नेब्यूला के केंद्र में अत्यधिक संकुचन से एक T Tauri तारा विकसित हुआ, जो आगे जाकर सूर्य में बदला। यह वही सूर्य है, जो हमें आज रोशनी और ऊर्जा देता है।

इसी बीच नेब्यूला के बाहरी भाग में गुरुत्वाकर्षण ने पदार्थ और धूल के कणों को संघनित कर दिया। इसके बाद बाकी बची प्रोटोप्लानेटरी डिस्क रिंगों में अलग होने लगी।

3. ग्रहों का निर्माण

Runaway accretion के नाम से जानी जाने वाली प्रक्रिया में धूल और मलबे के क्रमिक रूप से बड़े टुकड़े एक साथ मिलकर ग्रहों का निर्माण करते हैं। इसी क्रम में पृथ्वी लगभग 4.54 अरब वर्ष पहले बनी थी और इसका पूरा formation होने में 10-20 मिलियन वर्षों का समय लग गया था।

पृथ्वी के निर्माण के मात्र 10 मिलियन बाद एक primitive mantle और core (धातु की) आपस में अलग हो गए। जिससे पृथ्वी की सरंचना और इसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र का निर्माण हुआ। यह सब साइडरोफाइल धातुओं के पिघलने से हुआ, जो समय के साथ अत्यधिक गर्म हो गई थी।

4. पृथ्वी का इतिहास

पृथ्वी का इतिहास इसके निर्माण से लेकर आज तक पृथ्वी के विकास से संबंधित है। प्राकृतिक विज्ञान की लगभग सभी शाखाओं ने पृथ्वी के अतीत की मुख्य घटनाओं को समझने में योगदान दिया है, जो निरंतर भूवैज्ञानिक परिवर्तन और जैविक विकास की विशेषता है।

पृथ्वी का निर्माण आज से लगभग 4.54 अरब वर्ष पूर्व हुआ, जो ब्रह्मांड की आयु का लगभग एक-तिहाई है। ज्वालामुखी से निकलने वाली गैसों ने संभवतः आदिम वातावरण और फिर समुद्र का निर्माण किया, लेकिन शुरुआत में धरती के वातावरण में ऑक्सीजन न के बराबर थी।

अन्य पिंडों के साथ बार-बार टकराने के कारण पृथ्वी का अधिकांश भाग पिघल गया, जिसके परिणामस्वरूप अत्यधिक ज्वालामुखी उत्पन्न हुए। जब पृथ्वी अपने प्रारंभिक चरण में थी, तब माना जाता है कि एक थिया नामक ग्रह के आकार का पिंड पृथ्वी से टकराया।

यह टक्कर इतनी भयंकर थी कि इससे पृथ्वी का एक छोटा सा टुकड़ा टूटकर अलग हो गया। जिसे हम आज के समय में चंद्रमा के नाम से जानते हैं, जो धरती का एक प्राकृतिक उपग्रह है। समय के साथ पृथ्वी ठंडी होती गई, जिससे एक ठोस क्रस्ट का निर्माण हुआ।

परिणामस्वरूप सतह पर तरल पानी के बहाव के लिए जगह बन गई। पृथ्वी के इतिहास को मुख्यतः चार युगों में बांटा गया है। जो इस प्रकार से हैं- हैडियन, आर्कियन, प्रोटेरोज़ोइक और फैनेरोज़ोइक। इन अलग-अलग युगों में पृथ्वी का विकास अलग-अलग तरीकों से हुआ। जिसे हम नीचे विस्तार से समझेंगे।

5. हैडियन युग

पृथ्वी के इतिहास में पहला युग हैडियन, पृथ्वी के निर्माण के साथ शुरू होता है। उसके बाद 3.8 अरब वर्ष पहले आर्कियन युग की शुरुआत होती है। पृथ्वी पर पाई जाने वाली सबसे पुरानी चट्टानें आज से तकरीबन 4 अरब वर्ष पुरानी है और सबसे पुरानी चट्टान डेट्राइटल ज़िक्रोन क्रिस्टल है। यह आज से 4.4 अरब वर्ष पुरानी है।

अन्य खगोलीय पिंडों पर गड्ढों की गिनती से, यह अनुमान लगाया जाता है कि आसमान से धरती पर तीव्र उल्कापिंडों की बरसात हुई थी, जिसे लेट हैवी बॉम्बार्डमेंट कहा जाता है। यह लगभग 4.1 अरब से शुरू हुई और लगभग 3.8 अरब वर्ष पहले हेडियन युग के अंत में समाप्त हुई।

आर्कियन की शुरुआत तक, पृथ्वी काफी ठंडी हो चुकी थी। वर्तमान जीवन रूप पृथ्वी की सतह पर जीवित नहीं रह सकते थे, क्योंकि आर्कियन वातावरण में ऑक्सीजन की कमी थी। साथ ही सूरज से आने वाली पराबैंगनी किरणों को अवरुद्ध करने के लिए कोई ओजोन परत भी नहीं थी।

फिर भी यह माना जाता है कि आर्कियन युग में प्रारंभिक जीवन का विकास शुरू हुआ था, क्योंकि कुछ जीवाश्म लगभग 3.5 अरब वर्ष पुराने पाए गए हैं।

कुछ वैज्ञानिक यह भी अनुमान लगाते हैं कि पृथ्वी की सतह के नीचे हाइड्रोथर्मल वेंट में संभावित लेट हैवी बॉम्बार्डमेंट का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा था। इस कारण जीवन की शुरुआत हेडियन युग में ही हो गई थी।

6. चंद्रमा का निर्माण

पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा है, जो सौर मंडल के किसी भी अन्य उपग्रह की तुलना में अपने ग्रह के सापेक्ष बड़ा है। नासा के अपोलो मिशन के दौरान चंद्रमा की सतह से चट्टानों को पृथ्वी पर लाया गया था।

इन चट्टानों की रेडियोमेट्रिक डेटिंग से पता चलता है कि चंद्रमा 4.53 अरब वर्ष पुराना है, जो सौर मंडल के कम से कम 30 मिलियन वर्ष बाद बना है।

हालांकि नए साक्ष्यों से पता चलता है कि चंद्रमा का निर्माण बाद में हुआ, आज से 4.48 अरब वर्ष पहले या सौर मंडल की शुरुआत के 70-110 मिलियन वर्ष बाद।

हालांकि आज यह सिद्धान्त सबसे ज्यादा माना जाता है कि चंद्रमा का निर्माण पृथ्वी से हुआ था। लेकिन इसे सही मानने से पहले आपको इन तथ्यों पर जरूर गौर करना चाहिए।

सबसे पहले चंद्रमा का घनत्व कम है (पानी की तुलना में पृथ्वी का 5.5 और चंद्रमा का 3.3 गुना) और इसकी एक छोटी सी धातु की कोर है।
दूसरा चंद्रमा पर वस्तुतः कोई पानी या अन्य वाष्पशील पदार्थ नहीं है।

तीसरा, पृथ्वी और चंद्रमा में एक ही ऑक्सीजन समस्थानिक (ऑक्सीजन समस्थानिकों की सापेक्ष बहुतायत) है। इस तरह से इस सिद्धान्त को सबसे ज्यादा तवज्जो दी जाती है कि चंद्रमा का निर्माण पृथ्वी के साथ एक ग्रह की टक्कर से हुआ था। उस समय यह ग्रह मंगल के आकार का था, जिसे वैज्ञानिकों द्वारा थिया नाम दिया गया।

इस टक्कर ने बहुत ऊर्जा निष्कासित की, जिससे पृथ्वी की बाहरी परतें पिंघलने लगी। परिणामस्वरूप पृथ्वी पूरी तरह से गर्म हो गई। इस तरह से हमारे चंद्रमा का निर्माण हुआ, जिसने वक्त के साथ अपने अंदर बहुत से बदलाव किए हैं।

7. आर्कियन युग

4 अरब वर्ष पहले शुरू हुआ और 2.5 अरब वर्ष पहले खत्म हुआ आर्कियन युग, हेडियन युग की तुलना में काफी ठंडा और स्टेबल था। 4.6 से 4.0 अरब साल पहले, पृथ्वी के भूगर्भिक इतिहास में हैडियन ईऑन एक हिंसक समय था। लेकिन आर्कियन ईऑन में, पृथ्वी अंततः अधिक स्थिर जलवायु के साथ ठंडी होने लगी थी।

8. पृथ्वी पर महासागरों का निर्माण

आर्कियन कल्प में धरती ठंडी होने लगी। क्योंकि यह काफी ठंडा समय था, पानी अंततः संघनित होकर महासागरों का रूप ले सकता था। यह पानी पृथ्वी के एक बड़े हिस्से में था|

क्योंकि चंद्रमा ने पृथ्वी की जलवायु को मौसम देकर स्थिर कर दिया था। याद रखें कि हैडियन ईऑन में गर्मी का प्रवाह तीव्र था। उच्च तापमान के कारण ग्रह का पानी अंतरिक्ष में वाष्पित हो जाता था।

इसके अलावा heavy bombardment के समय अन्तरिक्ष से आने वाले धूमकेतु पानी को पृथ्वी तक लेकर आए थे। पानी की उत्पत्ति के लिए वैकल्पिक सिद्धांत यह भी है कि यह क्रस्ट के अंदर चट्टानों में मौजूद है।

क्योंकि पृथ्वी के आंतरिक भाग में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के साथ खनिज मौजूद थे। समय के साथ ज्वालामुखी लगातार “डीगैस्ड” होते हैं जो H2O को जल वाष्प के रूप में छोड़ते थे।

अब जब पृथ्वी की जलवायु स्थिर हो गई, पानी अब अत्यधिक तापमान से वाष्पित नहीं होता था। अंत में पानी संघनित हुआ और फिर महासागर बने। चूंकि पृथ्वी पर महासागर थे, यहीं से लगभग 3.5 अरब साल पहले जीवन की शुरुआत हुई थी।

9. महाद्वीपों का निर्माण

वैज्ञानिक अभी भी बहस करते हैं कि आर्कियन ईऑन में महाद्वीप मौजूद थे या नहीं। पहला सुपरकॉन्टिनेंट कब बना, इसका अभी तक कोई निश्चित जवाब नहीं है। इस बात के प्रमाण हैं कि पहले क्रेटन अब पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में स्थित हैं। सुपरकॉन्टिनेंट वालबारा का यह क्रस्ट 2.7 से 3.6 बिलियन साल पहले का है।

यह इस तथ्य से प्रतिध्वनित होता है कि आर्कियन ईऑन में पृथ्वी की पपड़ी ठंडी हो रही थी। इस ठंडी जलवायु ने महाद्वीपों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई, क्योंकि इस समय स्थलमंडल अधिक स्थिर हो गया था।

इसके अलावा क्योंकि महाद्वीपों के निर्माण के लिए टेक्टोनिक्स प्लेट आवश्यक हैं, इसका मतलब है कि इस युग में टेक्टोनिक गतिविधि मौजूद थी।

10. पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सिजन का भरना

आर्कियन ईऑन की शुरुआत में पृथ्वी ऑक्सीजन मुक्त थी। हालाँकि पानी के अणुओं में ऑक्सीजन थी लेकिन वे हाइड्रोजन से बंधे थे। इस युग में पृथ्वी का वातावरण ज्यादातर मीथेन और नाइट्रोजन गैसों से भरा था। अवायवीय सायनोबैक्टीरिया (नीला-हरा शैवाल) अस्तित्व में आने वाला जीवन का एकमात्र रूप था।

ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में, इन सूक्ष्म साइनोबैक्टीरिया ने सूर्य के प्रकाश को ऊर्जा में परिवर्तित करना शुरू किया। उन्होंने अपने स्वयं के भोजन को चयापचय करते हुए महासागरों में प्रकाश संश्लेषण किया। अपशिष्ट उत्पाद के रूप में इन साइनोबैक्टीरिया ने ऑक्सीजन को छोड़ना शुरू किया।

करोड़ों वर्षों के विकासक्रम के बाद पृथ्वी के वातावरण में ऑक्सिजन की भरपाई होने लगी। समय के साथ मुक्त ऑक्सीजन ने सायनोबैक्टीरिया के लिए जहर बनने लगी, जिससे उनके अपने अस्तित्व को ही खतरा पैदा हो गया था।

11. समुद्र तल पर लोहे का इकट्ठा होना

जैसे ही समुद्र में ऑक्सिजन की वृद्धि होने लगी और यह लोहे के साथ मिश्रित होने लगा। ऑक्सीजन के साथ क्रिया करने पर लोहे में जंग लग जाता है। इसलिए समय के साथ समुद्र तल पर जंग लगा लोहा इकट्ठा होने लगा था।

विश्व के अधिकांश लौह अयस्क भंडार आर्कियन ईऑन में उत्पन्न हुए थे। हम ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और रूस जैसे दुनिया भर में बैंडेड आयरन फॉर्मेशन पा सकते हैं, जो इसी युग में बने थे।

ऑक्सीजन महासागरों में जंग लगे लोहे का निर्माण करती रही। चूंकि महासागरों में जब जंग के लिए लोहा नहीं रह गया था, तो इस कारण ऑक्सीजन वातावरण में प्रवेश करने लगी। यह घटना ग्रेट ऑक्सीजनेशन इवेंट है जब वातावरण पहली बार ऑक्सीजन युक्त हुआ था।

12. आर्कियन ईऑन एक नजर में

आर्कियन ईऑन पृथ्वी के इतिहास का वो समय था जब पृथ्वी की जलवायु स्थिर होने लगी। पृथ्वी अपनी पिघली हुई अवस्था से ठंडी हो रही थी। यह अंततः महासागरों के लिए उपयुक्त समय था। टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों ने महाद्वीपों का निर्माण किया।

आर्कियन ईऑन में, वातावरण में ऑक्सीजन भरी हुई थी और दुनिया का अधिकांश लौह अयस्क समुद्रतल के आसपास जमा हो गया था। चूँकि पृथ्वी की स्थितियाँ स्थिर हो गईं थी, यूकेरियोटिक और बहुकोशिकीय जीवन अंततः प्रोटेरोज़ोइक ईऑन में विकसित हो सकते थे।

13. प्रोटेरोज़ोइक युग

2500 से 541 मिलियन वर्ष पूर्व का यह समय प्रोटेरोज़ोइक युग कहलाता है। प्रोटेरोज़ोइक ईऑन (2500 से 541 मिलियन वर्ष पहले) में पृथ्वी एक बहुत ही अलग जगह थी। आर्कियन ईऑन की तुलना में तापमान में काफी गिरावट आई। इन कठोर परिस्थितियों में बहुत अधिक जीवन नहीं बच सका।

हालांकि साइनोबैक्टीरिया के नाम से जाने जाने वाले कुछ सूक्ष्म जीवाणु मौजूद थे, उन्होंने ऑक्सीजन के खुद को जिंदा रख लिया था। ये बैक्टीरिया ऑक्सीजन छोड़ने के लिए जाने जाते थे। पृथ्वी का यह ऑक्सीजनकरण प्रोटेरोज़ोइक ईऑन में पूरी तरह से अपना प्रभाव छोड़ने लगा था।

14. साइनोबैक्टीरिया के लिए ऑक्सीजन संकट

ऑक्सीजन के बिना, प्रोटेरोज़ोइक ईऑन में केवल अवायवीय जीवन मौजूद था। इसी दौरान साइनोबैक्टीरिया के नाम से जाने जाने वाले सूक्ष्म जीवाणु पनपने लगे।

उनके जीवित रहने की सबसे बड़ी वजह यह थी कि उन्हें अस्तित्व में रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं थी। साइनोबैक्टीरिया सूर्य के प्रकाश का संश्लेषण करता और उसे ऊर्जा में परिवर्तित करता था।

लेकिन अपशिष्ट उत्पाद के रूप में उन्होंने ऑक्सीजन छोड़ी। तो लाखों वर्षों तक साइनोबैक्टीरिया ने ऑक्सीजन उत्पन्न की। आखिरकार उन्होंने महासागरों को ऑक्सीजन से भर दिया। सायनोबैक्टीरिया की विडंबना यह है कि उनके द्वारा छोड़ी गई ऑक्सीजन उनके लिए जहरीली थी।

प्रोटेरोज़ोइक ईऑन में साइनोबैक्टीरिया पूरी तरह से गायब नहीं हुआ था। कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में छिपकर, साइनोबैक्टीरिया ने अपने बड़े पैमाने पर विलुप्त होने से बचा लिया।

इस घटना को “ऑक्सीजन संकट” कहा जाता है, इसके यह कहे जाने का कारण यह है कि साइनोबैक्टीरिया ने अपने स्वयं के अपशिष्ट ऑक्सीजन के माध्यम से अपने अस्तित्व को खतरे में डाल दिया था।

15. धरती पर आइस एज

प्रोटेरोज़ोइक ईऑन में एक और महत्वपूर्ण घटना यह थी कि पृथ्वी पूरी तरह से जम गई थी। फिर से ऑक्सीजन ने “स्नोबॉल अर्थ” या “स्लशबॉल अर्थ” बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। याद रखें कि महान ऑक्सीजनकरण घटना से पहले धरती का वातावरण मीथेन से भरा हुआ था।

एक चीज जो मीथेन ने बहुत अच्छी तरह से की, वह थी वातावरण में ट्रैप हीट। वास्तव में यह मौजूद सबसे कुशल ग्रीनहाउस गैसों में से एक है। जब ऑक्सीजन मीथेन के साथ मिलती है, तो यह कार्बन डाइऑक्साइड का उत्पादन करती है।

क्योंकि वातावरण में मीथेन कम था, ग्रीनहाउस प्रभाव उतना मजबूत नहीं था। वायुमंडल में कम गर्मी के फंसने से पृथ्वी लगभग 30 करोड़ वर्षों तक जमी रही।

16. ओजोन परत की उपस्थिति

जो चीज पृथ्वी को विशिष्ट बनाती है वह है इसकी ओजोन परत। यह पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक है क्योंकि यह हमें सूर्य से हानिकारक विकिरणों से बचाती है। ग्रेट ऑक्सीजनेशन इवेंट के बाद, ऑक्सीजन परमाणु आपस में बंधन कर सकते थे और ओजोन बनाने के लिए स्वतंत्र थे।

समय के साथ ऊपरी वायुमंडल में पृथ्वी की ओजोन परत मोटी हो गई। ओजोन परत की पूर्ण उपस्थिति से पहले, जीवन उथले पानी तक ही सीमित था। ऐसा इसलिए है क्योंकि पानी हानिकारक विकिरण से बचाता है।

जब ओजोन ने पृथ्वी को घातक पैराबैंगनी किरणों से बचाना शुरू किया, तो इसने जीवन को भूमि पर पनपने में सक्षम बनाया। लेकिन यह पैलियोजोइक युग तक नहीं था जब जीवन ने वास्तव में जमीन पर उड़ान भरी थी।

17. यूकेरियोट्स और बहुकोशिकीय जीवों का उद्भव

हम जानते हैं कि पृथ्वी के पास जीवन को सहारा देने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ थीं। प्रोटेरोज़ोइक ईऑन में इस बात के प्रमाण हैं कि यूकेरियोट्स और बहुकोशिकीय जीव पृथ्वी पर दिखाई दिए।

यूकेरियोट्स को प्रोकैरियोट्स से अलग क्या बनाता है, वे थी इनकी जटिल कोशिकाएं। उनके जीन एक नाभिक में डीएनए के रूप में जमा होते हैं।

वैज्ञानिकों का मानना ​​​​है कि यूकेरियोटिक कोशिकाएं तब विकसित हुईं जब एक साधारण कोशिका एंडोसिम्बायोसिस के माध्यम से दूसरे को Engulfed कर लेती है। फिर बहुकोशिकीय जीवन विकसित हुआ क्योंकि अधिक संख्या में कोशिकाएँ एक-दूसरे के साथ जुडने लगी थी।

क्योंकि ये जीव जीवाश्म नहीं बने थे, जिस कारण यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि यूकेरियोट्स और बहुकोशिकीय जीव पृथ्वी पर कब विकसित हुए थे। बहुत पहले लास्ट यूनिवर्सल कॉमन एंसेस्टर (LUCA- Last Universal Common Ancestor) अस्तित्व में था।

18. फ़ैनरोज़ोइक युग

फ़ैनरोज़ोइक पृथ्वी पर वर्तमान युग है, जो लगभग 542 मिलियन वर्ष पहले शुरू हुआ था। इसमें तीन युग शामिल हैं: पैलियोज़ोइक, मेसोज़ोइक और सेनोज़ोइक। यह वह समय है जब बहु-कोशिकीय जीवन आज ज्ञात लगभग सभी जीवों में विविधतापूर्ण से मौजूद है।

पैलियोज़ोइक युग फ़ैनरोज़ोइक युग का पहला और सबसे लंबा युग था, जो 542 से 251 मिलियन इयर्स तक चला। पैलियोज़ोइक के दौरान, जीवन के कई आधुनिक समूह अस्तित्व में आए।

जीवन ने भूमि की तरफ रुख किया, पहले पौधे और फिर जानवर। प्रोटेरोज़ोइक के अंत में पैनोटिया और रोडिनिया के टूटने पर बने महाद्वीप धीरे-धीरे फिर से एक साथ मिलने लगे, जिससे पेलियोज़ोइक के अंत में सुपरकॉन्टिनेंट पैंजिया का निर्माण हुआ।

मेसोज़ोइक युग 251 मिलियन इयर्स से 66 मिलियन इयर्स तक चला। इसे त्रैसिक, जुरासिक और क्रेटेशियस काल में विभाजित किया गया है। युग की शुरुआत पर्मियन-ट्राएसिक विलुप्त होने की घटना के साथ हुई, जो जीवाश्म रिकॉर्ड में सबसे गंभीर विलुप्त होने की घटना है।

इस घटना में पृथ्वी पर मौजूद 95% प्रजातियों की मृत्यु हो गई थी। यह क्रेटेशियस-पेलोजेन विलुप्त होने की घटना के साथ समाप्त हुआ जिसने डायनासोर का सफाया कर दिया।

सेनोज़ोइक युग 66 मिलियन वर्ष पहले से शुरू हुआ, और इसे पैलियोजीन, निओजीन और क्वाटरनेरी काल में विभाजित किया गया है। इन तीन अवधियों को आगे सात उप-विभाजनों में विभाजित किया गया है, जिसमें पेलियोजीन (द पेलियोसीन), इओसीन, ओलिगोसिन, मिओसीन, प्लियोसीन, प्लेइस्टोसिन और होलोसीन है।

19. पैलियोजोइक युग

पैलियोजोइक युग में छह काल हैं: कैम्ब्रियन, ऑर्डोविशियन, सिलुरियन, डेवोनियन, कार्बोनिफेरस और पर्मियन।

  • कैम्ब्रियन काल

541 से 485 मिलियन वर्ष पूर्व तक का युग कैम्ब्रियन युग कहलाता है। कैम्ब्रियन काल को Cambrian Explosion के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इस दौरान पृथ्वी के इतिहास में एक ही अवधि में सबसे बड़ी संख्या में जीव विकसित हुए थे।

इस काल में शैवाल जैसे पौधे विकसित हुए और आर्थ्रोपोड जैसे जीव अन्य जीवों पर हावी रहे। इस अवधि में लगभग सभी समुद्री जीव विकसित हुए।

  • ऑर्डोविशियन काल

485 मिलियन वर्ष से 440 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय ओर्डोविशियन काल कहलाता है। इस समय में आज भी प्रचलित कई प्रजातियाँ विकसित हुईं, जैसे कि आदिम मछली, मूंगा आदि। हालाँकि जीवन के सबसे सामान्य रूप त्रिलोबाइट्स, घोंघे और शंख थे।

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि पहले आर्थ्रोपोड क्रेप ऐशोर (स्थलीय जीवनरूपों की शुरुआत) थे। ऑर्डोविशियन के अंत तक, गोंडवाना क्षेत्र भूमध्य रेखा से दक्षिणी ध्रुव पर चला गया था।

गोंडवाना के बर्फ में जाम जाने के परिणामस्वरूप समुद्र के स्तर में एक बड़ी गिरावट आई, जिससे इसके तट के साथ सभी जीव समाप्त हो गए।

  • ऑर्डोविशियन-सिलूरियन (First Mass Extinction)

इसे पृथ्वी के इतिहास में दूसरा सबसे घातक समय माना जाता है। इस घटना ने समुद्री जीवों को बहुत प्रभावित किया।
दक्षिणी महाद्वीप के रूप में गोंडवाना दक्षिणी ध्रुव पर बह गया और उस पर बर्फ की चोटियाँ बन गईं। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड के गिरावट आने से धरती पूरी तरह जम गई थी।

  • सिलुरियन काल

सिलुरियन 440 मिलियन वर्ष से 415 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय था। इस अवधि में मछलीयों में बड़े पैमाने पर विकास देखा गया। क्योंकि सबसे पहली मीठे पानी की मछली इसी समय विकसित हुई थी, हालांकि समुद्री बिच्छू जैसे आर्थ्रोपोड बड़े शिकारी बने रहे।

पूरी तरह से स्थलीय जीवन विकसित हुआ, जिसमें कवक और सेंटीपीड शामिल थे। संवहनी पौधों के विकास ने पौधों को भूमि पर पैर जमाने का मौका दिया।

इस समय के दौरान चार महाद्वीप थे: गोंडवाना (अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, भारत), लॉरेंटिया (यूरोप के कुछ हिस्सों के साथ उत्तरी अमेरिका), बाल्टिका (शेष यूरोप), और साइबेरिया (उत्तरी एशिया)। इस समय के दौरान पृथ्वी से बर्फ की चादर हटने लगी, परिणामस्वरूप जलीय जीवों को पनपने का मौका मिला।

  • देवोनियन काल

415 मिलियन वर्ष से 360 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय देवोनियन काल कहलाता है। इसे मछली युग के रूप में भी जाना जाता है, डेवोनियन काल में पाई जाने वाली मछलीयों में एक विशाल विविधीकरण की विशेषता है। इस काल में भूमि पर पहले पेड़ और बीज विकसित हुए। पौधों के विविध समूहों ने धरती पर अपने पैर पसारने शुरू किए।

मध्य देवोनियन तक पौधों के झाड़ीदार जंगल मौजूद थे। इस घटना ने आर्थ्रोपोड जीवन के विविधीकरण की के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाया।

और उन्होंने अपने इस नए आवास का भरपूर लाभ उठाया। इसी काल में पहले उभयचर भी विकसित हुए और मछलियाँ अब खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर थीं।

डेवोनियन के अंत के करीब सभी प्रजातियों में से 70% विलुप्त हो गईं, जिसे लेट डेवोनियन विलुप्त (Late Devonian extinction) होने के रूप में भी जाना जाता है। जो कि पृथ्वी के इतिहास में दूसरा mass extinction था।

Late Devonian extinction (Second Mass Extinction)

लेट डेवोनियन extinction लगभग 376-360 मिलियन वर्ष पहले हुई थी। ऐसा लगता है कि विलुप्त होने की इस घटना से केवल समुद्री जीवन प्रभावित हुआ था।

हालांकि इनके विलुप्त होने का कारण स्पष्ट नहीं हैं। प्रमुख परिकल्पनाओं में समुद्र के स्तर में परिवर्तन और महासागर एनोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी) शामिल हैं, जो संभवतः वैश्विक शीतलन या समुद्री ज्वालामुखी से उत्पन्न होते हैं।

  • कार्बोनिफेरस अवधि

360 मिलियन से 300 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय। इस काल में उष्णकटिबंधीय दलदल पृथ्वी पर हावी थे और बड़ी मात्रा में पेड़ों ने कार्बन का बहुत अधिक उत्पादन किया जिससे कोयले के भंडार बन गए (इसलिए कार्बोनिफेरस नाम)। इन दलदलों के कारण होने वाले उच्च ऑक्सीजन के स्तर ने बड़े पैमाने पर आर्थ्रोपोड का विकास किया।

शायद उस समय का सबसे महत्वपूर्ण विकासवादी विकास एम्नियोटिक अंडों का विकास था, जिसने उभयचरों के विकाश में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

(एमनियोटिक द्रव एक साफ, थोड़ा पीला तरल है जो भ्रूण को अंडे में घेरता है)। इसके अलावा पहले सरीसृप इन्हीं दलदलों में विकसित हुए।

पूरे कार्बोनिफेरस में एक शीतलन प्रभाव था, जिसके कारण अंततः गोंडवाना बर्फ में जम गया क्योंकि इसका अधिकांश भाग दक्षिणी ध्रुव के आसपास स्थित था।

  • पर्मियन अवधि

300 मिलियन से 250 मिलियन वर्ष पूर्व का समय पर्मियन काल कहलाता है। इसकी शुरुआत में सभी महाद्वीप एक साथ सुपर-महाद्वीप पैंजिया के रूप में मौजूद थे, जो पंथलासा नामक एक महासागर से घिरा हुआ था। इस समय के दौरान कठोर मौसम के साथ, पृथ्वी बहुत शुष्क थी। क्योंकि पानी के बड़े पिंड पैंजिया के आंतरिक भाग की जलवायु को नियंत्रित नहीं करते थे।

इस नई शुष्क जलवायु में सरीसृप पनपे। डिमेट्रोडोन और एडाफोसॉरस जैसे जीवों ने नए महाद्वीप पर शासन किया। पहले conifers (शंकु आकृति के पौधे) विकसित हुए, फिर स्थल पर यह प्रभावी हो गए। इस काल के अंत के करीब स्कूटोसॉरस और गोरगोनोप्सिड्स विकसित हुए।

लेकिन आखिरकार ये पृथ्वी पर सभी (लगभग 95% जीवन) साथ गायब हो गए, जिसे “द ग्रेट डाइंग” के रूप में जाना जाता है। जो दुनिया की तीसरी mass extinction होने की घटना है और इसके इतिहास में यह सबसे बड़ी घटना है।

Permian–Triassic extinction event (Third Mass Extinction)

पर्मियन-ट्राइसिक (पीटी) विलुप्त होने की घटना को ग्रेट डाइंग के रूप में भी जाना जाता है। यह लगभग 252 मिलियन वर्ष पहले हुआ था, जो पैलियोज़ोइक और मेसोज़ोइक युग के बीच की सीमा का निर्धारण करता है।

यह पृथ्वी की सबसे गंभीर ज्ञात विलुप्त होने की घटना है, जिसमें सभी समुद्री प्रजातियों का 96% तक और स्थलीय कशेरुकी प्रजातियों का 70% विलुप्त हो गया था।

विलुप्ति के सबसे बड़े कारणों में उल्का प्रभाव की घटनाएं, बड़े पैमाने पर ज्वालामुखी विस्फोट जैसे कि साइबेरियन ट्रैप, मीथेनोजेन्स के रूप में ज्ञात मीथेन-उत्पादक रोगाणुओं के कारण समुद्र तल से मीथेन की अचानक बड़ी मात्रा में उत्पादन। इन सब के कारण पृथ्वी के वातावरण में ग्रीन हाउस गैसों का बोलबाला हो गया। जिससे पृथ्वी पर जीवन धीरे-धीरे खत्म होने लगा।

20. मेसोज़ोइक युग

250 मिलियन से 66 मिलियन वर्ष पूर्व तक की अवधि मेसोज़ोइक युग कहलाती है। इसे “डायनासोर के युग” के रूप में भी जाना जाता है, मेसोज़ोइक में सरीसृपों का उदय होता है। मेसोज़ोइक को तीन भागों में बांटा गया है: ट्राइसिक, जुरासिक और क्रेटेशियस।

  • ट्राइसिक काल

250 मिलियन से 200 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय। यह पर्मियन विलुप्त होने और हरे-भरे जुरासिक काल के बीच एक संक्रमणकालीन समय है। इसके तीन प्रमुख युग हैं: अर्ली ट्राएसिक, मिडिल ट्राएसिक और लेट ट्राइसिक।

  • प्रारंभिक ट्राइसिक

250 मिलियन से 247 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय। इस समय तक पैंजिया महाद्वीप पूरी तरह रेगिस्तान था। पृथ्वी ने अभी-अभी एक बड़े पैमाने पर विनाश देखा था जिसमें जीवन का 95% विलुप्त हो गया था।

पृथ्वी पर इस समय जीवन लिस्ट्रोसॉरस, लेबिरिंथोडोंट्स, कई अन्य जीवों के रूप में मौजूद था, जो Permian–Triassic extinction से बचने में कामयाब रहे।

  • मध्य ट्राइसिक

247 मिलियन से 237 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय। मध्य त्रैसिक में पैंजिया के टूटने और टेथिस सागर के निर्माण की शुरुआत हुई थी। अब पारिस्थितिकी तंत्र उस विनाश की तबाही से उबर चुका था। फाइटोप्लांकटन, मूंगा और क्रस्टेशियंस सभी सामान्य हो गए थे और सरीसृप आकार में बढ़ने लगे।

नए जलीय सरीसृप, जैसे Ichthyosaurs समुद्र में पनपने लगे। इस बीच भूमि पर देवदार के जंगल पनपे, साथ ही मच्छर और फल मक्खियाँ भी। इस युग में पहले प्राचीन मगरमच्छ विकसित हुए, जिसने बड़े उभयचरों के साथ प्रति स्पर्धा को जन्म दिया।

  • लेट ट्राइसिक

237 मिलियन से 200 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय। इस युग में धरती के तापमान में लगातार वृद्धि हुई, साथ ही मध्यम वर्षा भी हुई। इस वार्मिंग के कारण भूमि पर सरीसृप के विकास में तेजी आई, जिससे पहले डायनासोर विकसित हुए और साथ ही साथ pterosaurs भी।

युग के अंत तक पहले विशाल डायनासोर विकसित हो चुके थे और विकसित pterosaurs ने पैंजिया के रेगिस्तानों को अपना घर बना लिया था।

हालांकि जलवायु परिवर्तन के कारण एक भयंकर विनाश हुआ, जिसे ट्राइसिक-जुरासिक विलुप्त होने की घटना (Fourth Mass Extinction) के रूप में जाना जाता है। जिसमें सभी बड़े उभयचर विलुप्त हो गए।

ट्राइसिक-जुरासिक विलुप्त होने की घटना (Fourth Mass Extinction)

यह 201 मिलियन वर्ष पहले त्रैसिक और जुरासिक काल के बीच के समय में हुई थी। यह घटना 10,000 से भी कम वर्षों में घटी और पैंजिया के टूटने से ठीक पहले हुई। भूमि पर कुछ बड़े उभयचरों को छोड़कर सभी आर्कोसॉर विलुप्त हो गए।

इस घटना ने स्थलीय पारिस्थितिक को खत्म कर दिया था, जिसने डायनासोरों के धरती पर राज करने के लिए अनुकूल स्थिति बना दी।
इस विनाश का कारण धीरे-धीरे जलवायु परिवर्तन, समुद्र के स्तर में उतार-चढ़ाव, समुद्री अम्लीकरण एक महत्वपूर्ण कारण था।

इसके अलावा बड़े पैमाने पर ज्वालामुखी विस्फोट से तीव्र ग्लोबल वार्मिंग (कार्बन डाइऑक्साइड या सल्फर डाइऑक्साइड का निर्माण) भी इसका एक कारण हो सकती है।

21. जुरासिक काल

200 मिलियन से 145 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय और इसमें तीन प्रमुख युग शामिल हैं: प्रारंभिक जुरासिक, मध्य जुरासिक और लेट जुरासिक।

  • प्रारंभिक जुरासिक

200 मिलियन से 175 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय। इस युग में ट्राइसिक की तुलना में जलवायु बहुत अधिक आर्द्र थी और इसके परिणामस्वरूप दुनिया बहुत उष्णकटिबंधीय थी। महासागरों में प्लेसीओसॉर, इचिथ्योसॉर और अम्मोनी जैसे जीव समुद्रों पर राज करते थे|

भूमि पर डायनासोर और अन्य सरीसृप राज करते थे। इस युग में पहले मगरमच्छ विकसित हुए, जिस कारण बड़े उभयचरों के विलुप्त होने की समस्या खड़ी हो गई।

फिर इसके बाद सरीसृप दुनिया पर राज करने के लिए विकसित होने लगे। इस बीच पहले स्तनधारी विकसित हुए, लेकिन कभी भी आकार में बड़े नहीं हो सके।

  • मध्य जुरासिक

175 मिलियन से 163 मिलियन वर्ष पूर्व तक फैला हुआ समय। इस युग के दौरान डायनासोर फले-फूले। साथ ही एलोसॉरस जैसे कई अन्य शिकारी भी अपनी धाक जमाने लगे।

शंकु आकार के वन पूरी धरती पर बड़ी मात्रा में फैलने लगते हैं। महासागरों में प्लेसीओसॉर और इचिथ्योसॉर फल-फूल रहे थे। यह युग सरीसृपों का गोल्डन समय था।

  • अंतिम जुरासिक

163 मिलियन से 145 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय। लेट जुरासिक सैरोपोड्स और इचिथ्योसॉर (sauropods और ichthyosaurs) के बड़े पैमाने पर विलुप्त होने का समय था।

क्योंकि इस समय पैंजिया, लौरसिया और गोंडवाना में विभाजित हो चुका था। इस विनाश को इतिहास में Jurassic-Cretaceous extinction के नाम से जाना जाता है। इस तरह से दुनिया दो भागों में विभाजित हो गई और जीवों के लिए यह एक नया वातावरण था।

22. क्रेटेशियस अवधि

145 मिलियन से 66 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय और इसे दो युगों में विभाजित किया गया है: अर्ली क्रेटेशियस, और लेट क्रेटेशियस।

  • अर्ली क्रेटेशियस

145 मिलियन से 100 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय। पृथ्वी पर फिर से मौसम बनने लगे और ध्रुव फिर से ठंडे होने लगे। चूंकि यह मगरमच्छों के लिए बहुत ठंडा था|

इसलिए यह बड़े उभयचरों का अंतिम समय था। इस युग में Pterosaurs अपनी अधिकतम विविधता तक पहुँच गए और बड़े हो गए। इस युग में पहले पक्षी विकसित हुए।

  • लेट क्रेटेशियस

100 मिलियन से 65 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय। यह युग काफी ठंडा था, साथ ही डायनासोर अभी भी नई प्रजातियों के रूप में विकसित हो रहे थे। बड़े शंकुधारी जंगलों के भीतर मार्सुपियल्स विकसित हुए। इसके अलावा पहले फूल वाले पौधे विकसित हुए।

क्रिटेशियस-पैलियोजीन विलुप्त होने की घटना (Fifth Mass Extinction)

क्रीटेशस-पेलोजेन (के-पीजी) या क्रेटेशियस-टर्शियरी (के-टी) विलुप्ति, लगभग 66 मिलियन वर्ष पहले पृथ्वी पर अचानक विनाश की विलुप्ति थी। क्रेटेशियस के अंत में डेक्कन ट्रैप और अन्य ज्वालामुखी विस्फोट वातावरण में जहर घोल रहे थे।

ऐसा माना जाता है कि इस समय एक बड़ा उल्का पिंड पृथ्वी से टकराया, जिससे चिक्सुलब क्रेटर (युकाटन प्रायद्वीप मेक्सिको) का निर्माण हुआ, जिसे के-टी विनाश की घटना के रूप में जाना जाता है।

10 किलोग्राम से अधिक वजन वाले सभी जीवित प्राणी विलुप्त हो गए, जिसमें सबसे ज्यादा डायनासोरों को नुकसान हुआ। यही वो घटना थी, जिसने डायनासोरों को धरती से विलुप्त कर दिया था।

23. सेनोज़ोइक युग

सेनोज़ोइक युग में स्तनधारियों से जानवरों का विकास हुआ। सेनोज़ोइक के तीन भाग हैं: पेलोजेन, निओजीन और क्वाटरनेरी।

  • पैलियोजीन अवधि

गैर-एवियन डायनासोर के विलुप्त होने के तुरंत बाद यानी 66 मिलियन से 23 मिलियन वर्ष पहले का समय। इसमें तीन युग हैं: पेलियोसीन, इओसीन और ओलिगोसीन।

  • पैलियोसीन

इस युग में धरती Fifth Mass Extinction के बाद रिकवर कर रही थी। इस समय महाद्वीपों ने अपना आधुनिक आकार लेना शुरू कर दिया, सभी महाद्वीप एक दूसरे से अलग हो गए।

टेथिस सागर ने एफ्रो-यूरेशिया को अलग कर दिया, और अमेरिका को पनामा के जलडमरूमध्य से अलग कर दिया गया, क्योंकि पनामा का इस्तमुस अभी तक नहीं बना था।

इस युग में एक सामान्य वार्मिंग प्रवृत्ति दिखाई दी और जंगल अंततः ध्रुवों पर पहुंच गए। शार्क महासागरों पर राज करने लगी क्योंकि बड़े सरीसृप जो कभी शासन करते थे, वे विलुप्त हो गए।

मेसोज़ोइक के दौरान विकसित हुए प्रारंभिक प्राइमेट जैसे पुरातन स्तनधारियों ने पृथ्वी को जीवों से भर दिया। इस समय स्तनधारी अभी भी काफी छोटे थे, जिस कारण विशाल मगरमच्छ और सांप सबसे बड़े शिकारी थे।

  • इयोसीन

56 मिलियन से 34 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय। प्रारंभिक इओसीन में अधिकांश भूमि पर स्तनधारी छोटे थे और जंगलों में रहते थे। कुछ-कुछ पेलियोसीन की तरह। इनमें शुरुआती प्राइमेट, व्हेल और घोड़े के साथ-साथ कई अन्य शुरुआती स्तनधारी भी थे।

इस युग में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस था। ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका के बीच सर्कम-अंटार्कटिक धारा का गठन हुआ जिसने दुनिया भर में समुद्री धाराओं को बाधित कर दिया|

जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक हिमनद की शुरुआत हुई, जो जंगलों के सिकुड़ने का कारण बना। अपने अंत में इओसीन युग ने ऋतुओं के पुनर्जन्म को देखा, जिससे घास के विकास के साथ-साथ सवाना जैसे क्षेत्रों का विस्तार हुआ।

  • ओलिगोसीन

33 मिलियन से 23 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय। इस अवधि में घास का एक वैश्विक विस्तार हुआ, जिसके कारण कई नई प्रजातियों का विकास हुआ। जिनमें पहले हाथी, बिल्ली, कुत्ते, मार्सुपियल और कई अन्य प्रजातियां शामिल हैं जो आज भी हमारे बीच मौजूद हैं।

इस युग के दौरान पौधों की कई अन्य प्रजातियों का भी विकास हुआ, जैसे सदाबहार पेड़। लंबे समय तक शीतलन जारी रहा और मौसमी बारिश के पैटर्न स्थापित हुए। इसी बीच स्तनधारी बड़े होते रहे। Paraceratherium इस युग के दौरान अब तक का सबसे बड़ा भूमि स्तनपायी विकसित हुआ।

24. निओजीन काल

23.03 मिलियन से 2.58 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय। इसमें 2 युग हैं: मियोसीन, और प्लियोसीन।

  • मिओसिन

23.03 से 5.333 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय। इस युग में जंगल घटने लगे और घास फैलने लगी। टेथिस सागर अंततः अरब प्रायद्वीप के निर्माण के साथ खत्म हो गया और इसके मद्देनजर काला, लाल, भूमध्यसागरीय और कैस्पियन समुद्र अपने पीछेछोड़ दिया। कई नए पौधे विकसित हुए और आधुनिक बीज पौधों का 95% मध्य-मियोसीन में विकसित हुआ।

  • प्लियोसीन

5.333 से 2.58 मिलियन वर्ष पूर्व तक का समय। प्लियोसीन में नाटकीय जलवायु परिवर्तन हुए, जिसने आधुनिक प्रजातियों और पौधों को जन्म दिया। भूमध्य सागर कई हजार वर्षों तक सूखा रहा।

आस्ट्रेलोपिथेकस अफ्रीका में विकसित हुआ, जिसने मानव पूर्वजों को जन्म दिया। इस युग में पनामा के इस्थमस का गठन हुआ और जानवर उत्तर और दक्षिण अमेरिका के बीच चले गए। जलवायु परिवर्तन ने सवाना मैदानों को विकसित किया जो दुनिया भर में फैलने लगा।

भारतीय मानसून, पूर्वी एशिया में रेगिस्तान और सहारा रेगिस्तान की शुरुआत इसी समय में हुई थी। पृथ्वी के महाद्वीप और समुद्र अपने वर्तमान आकार में आ चुके थे।

25. Quaternary युग

2.58 मिलियन वर्ष पूर्व से आज तक का समय। इसमें आधुनिक जानवर और जलवायु में नाटकीय परिवर्तन शामिल हैं। इसे दो युगों में विभाजित किया गया है: प्लेइस्टोसिन और होलोसीन।

  • प्लेस्टोसीन

2.58 मिलियन से 11,700 साल पहले तक का समय। Mid-Eocene युग में शुरू हुए हिम युग ने इस युग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। इस युग में अफ्रीका ने शुष्कीकरण की प्रवृत्ति का अनुभव किया जिसके परिणामस्वरूप सहारा, नामीबिया और कालाहारी रेगिस्तानों का निर्माण हुआ।

इस युग में मैमथ, भयानक भेड़िये और सबसे प्रसिद्ध होमो सेपियन्स सहित कई जानवर विकसित हुए। 1,00,000 साल पहले अफ्रीका महाद्वीप सूखे से जूझ रहा था और यही आदिम मनुष्य के विस्तार का कारण बना। जैसे ही प्लेइस्टोसिन का अंत करीब आया, एक बड़े विनाश की घटना ने दुनिया के अधिकांश मेगाफौना को मिटा दिया, जिसमें कुछ होमिनिड प्रजातियां, जैसे निएंडरथल शामिल थी।

  • होलोसीन युग

होलोसीन 11,700 साल पहले शुरू हुआ था और आज तक चलता है। पूरा दर्ज इतिहास और “दुनिया का इतिहास” होलोसीन युग की सीमाओं के भीतर है।

मानव को बड़े पैमाने पर विनाश के लिए दोषी ठहराया जाता है जो लगभग 10,000 साल पहले शुरू हुआ था।हालांकि विलुप्त होने वाली प्रजातियां औद्योगिक क्रांति के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है।

इसे कभी-कभी ” Sixth Mass Extinction” के रूप में भी जाना जाता है। औद्योगिक क्रांति के बाद से मानव गतिविधि के कारण 322 से अधिक प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं।

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Conclusion:

तो दोस्तों ये था पृथ्वी का निर्माण, जनम और विकास कैसे हुआ, हम उम्मीद करते है की इस आर्टिकल की मद्दद से आपको पूरी जानकारी मिल गयी होगी|

हमने इस पोस्ट में आपक बेस्ट और सही जानकारी देने की कोशिश करी है और यदि आपको ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो प्लीज इसको १ लाइक जरुर करे और अपने दोस्तों के साथ फेसबुक और whatsapp पर भी जरुर शेयर करे|

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