सौरमंडल की उत्पत्ति कैसे हुई | सौरमंडल कैसे बना

हमारा सौरमंडल एक अद्भुत जगह है। सौरमंडल की दुनिया अरबों किलोमीटर में फैली हुई है, जिसके केंद्र में हमारा सूर्य स्थित है।

सौरमंडल की प्रत्येक ऑब्जेक्ट इस स्टार के चारों ओर चक्कर लगाती है। इसमें कुछ स्थलीय तो कुछ गैसीय ग्रह हैं, जिनमें से एक पर जीवन संभव है।

यह वही ग्रह है, जिस पर हम आज अपना जीवन जी रहे हैं। कुछ विशाल बाहरी ग्रह गैस और बर्फ से ढके हुए हैं। यह ग्रह अपने आप में एक छोटा सौरमंडल बनाते है। जिनके खुद के मून और छले हैं।

हमारे सौरमंडल में क्षुद्रग्रह, धूमकेतु और प्लूटो व सेरेस जैसे जटिल बौने ग्रह भी मौजूद हैं। हमारा सौरमंडल कैसे बना? ये वस्तुएं क्यों हैं जहां वे अभी हैं? इन सवालों के जवाब हमें अतीत में झाँकने पर मिलते हैं।

आज के इस आर्टिक्ल में उन घटनाओं की जानकारी दी गई है, जिन्होंने हमारे सौर मंडल को बनाया और आकार दिया।

सौरमंडल क्या है?

saurmandal kya hai

हमारे सौर मंडल में एक तारा है, जिसे हम सूर्य कहते हैं। इसमें 8 ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून है।

इसके अलावा सौरमंडल में ग्रहों के उपग्रह, धूमकेतु, क्षुद्रग्रह और उल्कापिंड भी मौजूद है। सूर्य सौरमंडल में विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा (ज्यादातर गर्मी और प्रकाश के रूप में) का सबसे समृद्ध स्रोत है।

सूर्य का निकटतम ज्ञात तारा प्रॉक्सिमा सेंटॉरी नामक एक लाल बौना तारा है, जो 4.3 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है।

एक स्पष्ट रात में दिखाई देने वाले स्थानीय सितारों के साथ पूरा सौर मंडल, हमारी आकाशगंगा मिल्की-वे के केंद्र की परिक्रमा करता है। 200 अरब सितारों से बनी एक सर्पिल डिस्क, जिसे हम मिल्की-वे कहते हैं।

मिल्की-वे आकाशगंगा के पास दो छोटी आकाशगंगाएँ मौजूद हैं जो इसकी परिक्रमा करती हैं। यह दक्षिणी गोलार्ध से दिखाई देती हैं।

इन्हें लार्ज मैगेलैनिक क्लाउड और स्मॉल मैगेलैनिक क्लाउड कहा जाता है। हमारी आकाशगंगा के निकटतम सबसे बड़ी आकाशगंगा एंड्रोमेडा गैलेक्सी है।

यह मिल्की-वे की तरह एक सर्पिल आकाशगंगा है। लेकिन यह मिल्की-वे से 4 गुना विशाल है और 2 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर है। हमारी आकाशगंगा, जो ज्ञात अरबों आकाशगंगाओं में से एक है। यह अंतरिक्ष के माध्यम से लगातार यात्रा कर रही है।

सौरमंडल के ग्रह और उनके अधिकांश उपग्रह और क्षुद्रग्रह सूर्य के चारों ओर एक ही दिशा में, लगभग गोलाकार कक्षाओं में घूमते हैं।

सूर्य के उत्तरी ध्रुव के ऊपर से नीचे देखने पर, ग्रह वामावर्त दिशा में परिक्रमा करते हैं। ग्रह सूर्य की परिक्रमा उसी तल में या उसके निकट करते हैं, जिसे अण्डाकार कक्ष कहते हैं।

प्लूटो एक अलग प्रकार का ग्रह है, जिसमें इसकी कक्षा सबसे अधिक झुकी हुई (18 डिग्री) और सभी ग्रहों में सबसे अधिक अण्डाकार है।

सौर मंडल की संरचना

solar system in hindi

सूर्य में सौर मंडल के सभी पदार्थों का 99.85% हिस्सा है। यानी सूर्य में सौरमंडल का 99.85% पदार्थ समाया हुआ है। जिन ग्रहों ने सूर्य को बनाने वाली सामग्री की एक ही डिस्क से संघनित किया, उनमें सौर मंडल के द्रव्यमान का केवल 0.135% हिस्सा है।

बृहस्पति का संयुक्त रूप से अन्य सभी ग्रहों के द्रव्यमान का दोगुने से अधिक हैं। शेष 0.015% पदार्थ ग्रहों, धूमकेतु, क्षुद्रग्रहों, उल्कापिंडों और अंतर्ग्रहीय माध्यम के उपग्रहों का निर्माण करते हैं। हमारे सौरमंडल के कुल द्रव्यमान का वितरण इस प्रकार है-

  • सूर्य: 99.85%
  • ग्रह: 0.135%
  • धूमकेतु: 0.01%
  • उपग्रह: 0.00005%
  • लघु ग्रह: 0.0000002%
  • उल्कापिंड: 0.0000001%
  • अंतरग्रहीय माध्यम: 0.0000001%

इंटरप्लेनेटरी स्पेस

आयतन के हिसाब से सौर मंडल एक खाली शून्य प्रतीत होता है। शून्यता से दूर, “अंतरिक्ष” के इस निर्वात में अंतरग्रहीय माध्यम शामिल है। इसमें ऊर्जा के विभिन्न रूप और कम से कम दो भौतिक घटक शामिल हैं: इंटरप्लेनेटरी डस्ट और इंटरप्लेनेटरी गैस।

इंटरप्लेनेटरी डस्ट में सूक्ष्म ठोस कण होते हैं। इंटरप्लेनेटरी गैस, गैस और आवेशित कणों का एक प्रवाह है, जिसमें ज्यादातर प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं। इसे प्लाज्मा भी कहा जाता है, जो सूर्य से निकलते हैं। इस कारण इन्हें सौर हवा भी कहा जाता है।

सौरमंडल की उत्पत्ति कैसे हुई?

solar system origin in hindi

सूर्य और सौर मंडल की उत्पत्ति गैस और धूल के एक बादल के संघनन से हुई थी, जैसा कि अक्सर हमारी आकाशगंगा में देखा जाता है।

इस बादल को नेब्यूला के नाम से जाना जाता है। सौर मंडल का निर्माण लगभग 4.6 अरब साल पहले एक इसी नेब्यूला के ढहने से शुरू हुआ था।

इस बादल का अधिकांश द्रव्यमान केंद्र में एकत्र हो गया, जिससे सूर्य का निर्माण हुआ। जबकि बाकी पदार्थ एक प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क में चपटा हो गया।

जिसमें से ग्रह, चंद्रमा, क्षुद्रग्रह और अन्य छोटे सौर मंडल के पिंड बने। नेबुलर परिकल्पना के रूप में जाना जाने वाला यह मॉडल पहली बार 18 वीं शताब्दी में इमानुएल स्वीडनबॉर्ग, इमैनुएल कांट और पियरे-साइमन लाप्लास द्वारा दिया गया था।

इसके बाद के विकास ने खगोल विज्ञान, रसायन विज्ञान, भूविज्ञान, भौतिकी और ग्रह विज्ञान सहित कई वैज्ञानिक विषयों को आपस में जोड़ा है।

1950 के दशक में अंतरिक्ष युग की शुरुआत और 1990 के दशक में एक्स्ट्रासोलर ग्रहों की खोज के बाद से, इस मॉडल को चुनौती दी गई।

सौर मंडल अपने प्रारंभिक गठन के बाद से काफी विकसित हुआ है। कई चंद्रमा अपने मूल ग्रहों के चारों ओर गैस और धूल की चक्करदार डिस्क से बने हैं।

जबकि अन्य चंद्रमा स्वतंत्र रूप से बने हैं। फिर बाद में उनके ग्रहों द्वारा अपने गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में इनको स्थापित कर लिया। इसके अलावा पृथ्वी का चंद्रमा पृथ्वी का ही एक हिस्सा है, जो किसी बड़ी टक्कर के कारण पृथ्वी से अलग हुआ था।

पिंडों के बीच टकराव आज भी लगातार जारी है और सौर मंडल के विकास का केंद्र रहा है। ऐसा हो सकता है कि गुरुत्वाकर्षण के कारण ग्रहों की स्थिति बदल गई हो।

1. सूर्य का जन्म

sun

13.8 अरब साल पहले बिग बैंग की घटना से ब्रह्मांड अस्तित्व में आया था। हमारा सौर मंडल लगभग 4.6 अरब साल पहले, यानी बिग बैंग के बहुत बाद में बना था।

बिग बैंग की घटना के बाद धूल और गैस के कण अन्तरिक्ष में तैरने लगे, जिन्होंने गुरुत्वाकर्षण बल के कारण एक विशाल बादल का रूप धारण कर लिया।

यह बादल हमारी आकाशगंगा के केंद्र की परिक्रमा करता था। जिसमें ज्यादातर हाइड्रोजन था। इसके अलावा इसमें कुछ हीलियम और पहले के स्टार्स द्वारा बनाए गए भारी तत्व भी थे।

इसके अगले 100,000 वर्षों में यह बादल अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण गर्म होने लगा, जिसके परिणामस्वरूप यह बादल धीरे-धीरे ढहने लगा। इस घटना ने बहुत से प्रोटोस्टार का निर्माण किया, जिनमें से एक हमारा सूर्य था।

यह हमारा नया सूर्य 50 मिलियन वर्षों तक पदार्थ जमा करता रहा। फिर एक बिंदु पर आकर तापमान और कोर में दबाव इतना तीव्र हो गया कि हाइड्रोजन हीलियम में फ़्यूज़ होने लगा।

और फिर सूर्य से प्रकाश चमकने लगा, यह पहला समय था जब हमारा सूरज पहली बार चमका था। सूरज के अंदर होने वाली हाइड्रोजन संलयन ने जबरदस्त मात्रा में ऊर्जा निकाली।

यह ऊर्जा सूर्य के गुरुत्वाकर्षण का मुकाबला करने लगी है और इस युवा तारे को स्थिर कर दिया। फिर सूर्य ने अपने जीवन के सबसे लंबे चरण में प्रवेश किया और एक मुख्य अनुक्रम तारा बन गया। यह आज भी इसी चरण में है और लगभग 5 अरब वर्षों तक ऐसा ही रहेगा।

2. ग्रहों का निर्माण

solar system planets ka janam

सूर्य के जन्म के समय जब यह हाइड्रोजन का संलयन शुरू करने के लिए पदार्थ एकत्र कर रहा था, तो उस समय इसके चारों ओर एक डिस्क ने जन्म लिया।

यह डिस्क धूल के छोटे कणों से मिलकर बनी थी। ये कण आपस में टकराते और एक-दूसरे से चिपक जाते थे। समय के साथ इन कणों ने सैंकड़ों मीटर लंबी और चौड़ी ओब्जेक्ट्स का निर्माण किया।

यह प्रक्रिया कई हज़ार वर्षों तक जारी रही, जिससे किलोमीटर के आकार की वस्तुएँ इतनी बड़ी बन गईं कि वे एक-दूसरे को गुरुत्वाकर्षण की ओर आकर्षित करने लगी।

इससे अधिक टकराव और अभिवृद्धि हुई, जिससे दस लाख से भी कम वर्षों में चंद्रमा के आकार के प्रोटोप्लैनेट बन गए। हालांकि यह टकराव काफी धीमा था, अन्यथा ग्रह आपस में टकराकर चकनाचूर हो जाते।

3. आंतरिक ग्रहों का निर्माण

फिर सौर डिस्क के भीतरी गर्म भाग में ग्रह मुख्य रूप से चट्टानों और धातुओं से विकसित हुए। क्योंकि डिस्क के भीतर यह पानी और अन्य वाष्पशील पदार्थों के लिए बहुत गर्म था।

फिर ये सभी प्रोटोप्लैनेट आपस में 100 मिलियन वर्षों तक आंतरिक सौर मंडल में टकराए और एकत्र हो गए। यह घटना तब तक हुई जब तक कि बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल जैसे पिंड न बच गए हो।

इस तरह से आंतरिक ग्रहों का निर्माण हुआ। फिर इन ग्रहों ने अपनी कक्षा में मौजूद मलबे को अपने अंदर समाहित कर इसे पूरी तरह साफ कर दिया।

आंतरिक ग्रह बाहरी ग्रहों की तरह बड़े नहीं हुए क्योंकि ब्रह्मांड में उपलब्ध चट्टानों और धातुओं का प्रतिशत, हाइड्रोजन, हीलियम और पानी की बर्फ जैसे वाष्पशील की तुलना में कम था।

यानी जो ग्रह हाइड्रोजन, हीलियम और पानी से बने वो विशाल थे, और जो बाकी पदार्थों से बने वो छोटे थे। इसके अलावा सूर्य ने ऊर्जा और कणों को एक स्थिर धारा में भेजा, जिसे तारकीय हवाएं कहा जाता है।

ये हवाएँ इतनी तेज़ साबित हुईं कि उन्होंने सूर्य के सबसे नज़दीकी चार ग्रहों की अधिकांश गैसों को उड़ा दिया, जिससे वे छोटे रह गए, केवल उनकी चट्टानें और धातुएँ बरकरार रहीं। इसलिए उन्हें चट्टानी, या स्थलीय, ग्रह कहा जाता है।

जबकि चारों बाहरी ग्रह सूर्य से इतनी दूर थे कि इसकी हवाएं अपनी बर्फ और गैसों को नहीं उड़ा सकती थीं। वे केवल एक छोटे चट्टानी कोर के साथ गैसीय बने रहे।

इस समय के बाद मंगल के आकार का एक ग्रह पृथ्वी से टकराया। जिसके परिणामस्वरूप चंद्रमा का निर्माण हुआ।

इसके अलावा शायद बुध की भी किसी अन्य ग्रह के साथ उच्च गति से टक्कर हुई हो, जिसने बुध की बाहरी परत को खत्म कर दिया था। परिणामस्वरूप मलबा चंद्रमा बनने के बजाय अंतरिक्ष में फैल गया होगा।

4. बाहरी ग्रहों का निर्माण

सूर्य के निर्माण के समय बनी डिस्क के बाहरी, ठंडे हिस्से में गैस और बर्फ काफी मात्रा में थी। इस क्षेत्र में सूर्य के कमजोर गुरुत्वाकर्षण प्रभाव और काफी अधिक पदार्थ की उपस्थिति के कारण ये प्रोटोप्लैनेट तेजी से बढ़ने लगे।

एक समय के बाद ये हाइड्रोजन और हीलियम जैसे हल्के तत्वों को आकर्षित करने के लिए ताकतवर बन गए।

इसी क्रम में हमारा बृहस्पति ग्रह का निर्माण हुआ था। बृहस्पति सौर मंडल के जन्म के 3 मिलियन वर्ष से भी कम समय में बना, जिससे यह सबसे बड़ा ग्रह बन गया।

जब बृहस्पति ने बाहरी डिस्क के इतने बड़े हिस्से को निगल लिया था, तो बचा पदार्थ जमा करने के कुछ ही समय बाद शनि का निर्माण हुआ।

इसके बाद थोड़ा हाइड्रोजन और हीलियम बचे होने के कारण अगले ग्रह यूरेनस और नेपच्यून का निर्माण हुआ। इन्होंने पानी और अमोनिया जैसे अधिक बर्फ जमा किए। यही कारण है कि हम उन्हें बर्फ के बने ग्रह कहते हैं।

इसके बाद बृहस्पति ने ग्रहों को क्षुद्रग्रह बेल्ट से टकराने नहीं दिया क्योंकि इसके गुरुत्वाकर्षण ने दर्जनों चंद्रमा और मंगल के आकार के छोटे ग्रहों को अपनी ओर खींच लिया, जिससे वे या तो टकरा गए और अन्य पिंडों में टूट गए या उन्होंने अपना क्षेत्र छोड़ दिया।

इस प्रक्रिया में बृहस्पति के बनने के कुछ दस मिलियन वर्ष बाद, क्षुद्रग्रह बेल्ट का निर्माण हुआ। जिसमें केवल चट्टान, बर्फ और धातु के छोटे पिंड मौजूद थे। जो सामूहिक रूप से पृथ्वी के द्रव्यमान के 1% से कम वजन का है।

क्षुद्रग्रह बेल्ट में सबसे बड़ी वस्तु सेरेस को बाहरी माना जाता है क्योंकि इसमें बहुत सारे ऑर्गेनिक्स और पानी की बर्फ है, जिसका अर्थ है कि यह संभवतः दूर से बना था और फिर बेल्ट में चला आया।

आंतरिक और बाहरी ग्रहों के बीच लाखों क्षुद्रग्रहों से भरा एक क्षेत्र है। इसमें सौर मंडल के गठन से बचे छोटे चट्टानी, बर्फीले और धातु के पिंड है।

इस क्षेत्र में कोई ग्रह नहीं बना। खगोलविदों का मानना ​​है कि बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण ने इस क्षेत्र को इतना प्रभावित किया कि कोई भी बड़ा ग्रह आकार नहीं ले सका।

बृहस्पति पृथ्वी के आकार (व्यास में) का 11 गुना और अन्य सभी ग्रहों की तुलना में दोगुने से भी अधिक बड़ा है। यह स्टार बनने के लिए लगभग काफी बड़ा है।

चार चट्टानी ग्रहों में से बुध सबसे छोटा है, जो पृथ्वी के आकार का लगभग दो-पांचवां है। पृथ्वी और शुक्र लगभग एक ही आकार के हैं, जबकि मंगल का आकार उनसे लगभग आधा है।

5. एस्ट्रोइड बेल्ट

asteroid belt

सौर मंडल के जीवन की शुरुआत में, सूर्य की परिक्रमा करने वाली धूल और चट्टान को गुरुत्वाकर्षण द्वारा ग्रहों ने अपने अंदर समाहित कर लिया था।

लेकिन सभी पदार्थ ग्रहों में समाहित नहीं हो पाए थे। जिनसे मंगल और बृहस्पति के बीच का क्षेत्र क्षुद्रग्रह बेल्ट बन गया। कभी-कभी लोग आश्चर्य करते हैं कि क्या बेल्ट एक नष्ट ग्रह के अवशेषों से बना है, या एक ऐसी दुनिया जो अभी तक शुरू नहीं हुई है।

हालांकि नासा के अनुसार बेल्ट का कुल द्रव्यमान चंद्रमा से कम है, एक ग्रह के रूप में वजन करने के लिए बहुत छोटा है। एस्ट्रोइड बेल्ट पूरी तरह से बृहस्पति ग्रह के कंट्रोल में है, जो इस मलबे को किसी अन्य ग्रह में समाहित होने से रोकता है।

अन्य ग्रहों के अवलोकन वैज्ञानिकों को सौर मंडल को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर रहे हैं।

ग्रैंड टैक के रूप में जाना जाने वाला एक विकासशील सिद्धांत के अनुसार, सौर मंडल के पहले 5 मिलियन वर्षों में, बृहस्पति और शनि दिशा बदलने और बाहरी सौर मंडल में वापस जाने से पहले सूर्य की ओर चले गए थे।

फिर रास्ते में उन्होंने मूल क्षुद्रग्रह बेल्ट के पदार्थों को बिखेर दिया होगा। हमारा सौर मंडल केवल अकेला क्षुद्रग्रह बेल्ट वाला नहीं है। ज़ेटा लेपोरिस नामक तारे के चारों ओर धूल का एक बादल बेल्ट जैसा दिखता है।

जीटा लेपोरिस के आसपास हमने जो प्रणाली देखी, वह वैसी ही है जैसी हम सोचते हैं कि हमारे अपने सौर मंडल के शुरुआती वर्षों में हुई थी जब ग्रह और क्षुद्रग्रह बने थे।

पृथ्वी पर स्थितियां

जब चट्टानी ग्रह पहली बार बने, तो वे बड़े पैमाने पर पिघले हुए थे। सैकड़ों लाखों वर्षों में, वे धीरे-धीरे ठंडे होते गए। अंततः बुध और मंगल, क्योंकि वे छोटे और ठोस हैं। वे अपने केंद्रों में पूरी तरह से कठोर बन गए।

केवल पृथ्वी पर और संभवतः शुक्र पर स्थितियाँ बीच-बीच में बनी हुई थी। पृथ्वी आंशिक रूप से पिघली हुई है। इसकी पपड़ी ठोस चट्टान है, और इसका आवरण अल्पावधि में कठोर है।

लेकिन भूगर्भिक समय के साथ मेंटल धीरे-धीरे बहता है। पृथ्वी के केंद्र में एक ठोस लोहे का कोर है जो मैग्मा नामक गर्म तरल में घूमता है।

कुछ वैज्ञानिक और बड़े इतिहासकार पृथ्वी पर स्थितियों का वर्णन करने के लिए “गोल्डीलॉक्स की स्थिति” शब्द का उपयोग करते हैं।

पृथ्वी न तो बहुत गर्म है और न ही बहुत ठंडी है, न बहुत बड़ी है और न ही बहुत छोटी है, न सूर्य के पास है और न ही बहुत दूर है, लेकिन जीवन के फलने-फूलने के लिए सही है।

1. पृथ्वी का चंद्रमा

moon

हमारे सबसे निकट की चट्टानी वस्तु चंद्रमा है। यह कहां से आया था? अच्छा प्रश्न। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है, सूर्य की नहीं, इसलिए यह कोई ग्रह नहीं है। चंद्रमा पृथ्वी के आकार का लगभग एक चौथाई है।

चंद्रमा की उत्पत्ति रहस्यमय बनी हुई है, लेकिन चूंकि अंतरिक्ष यात्री 1969 में चंद्रमा पर गए और चट्टान और मिट्टी के नमूने वापस लाए, इसलिए हम इसके बारे में पहले की तुलना में अधिक जानते हैं।

आज का मानक तर्क यह मानता है कि एक छोटा ग्रह, पृथ्वी के आकार का लगभग दसवां हिस्सा, लगभग 4.45 अरब साल पहले पृथ्वी से टकराया होगा।

उस समय पतली नई परत के नीचे पृथ्वी अभी भी लाल-गर्म थी। प्रभाव से कुछ पदार्थ तरलीकृत पृथ्वी में अवशोषित हो गई थी, लेकिन कुछ सामग्री अंतरिक्ष में निकल गई।

जहां यह कक्षा में बस गई और चंद्रमा के रूप में संघनित हो गई। सबसे पहले चंद्रमा ने पृथ्वी के बहुत करीब परिक्रमा की। यह अभी भी प्रति वर्ष लगभग दो इंच (चार सेंटीमीटर) की दर से दूर जा रहा है।

चंद्रमा पृथ्वी पर स्थितियों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है। चंद्रमा को उत्पन्न करने वाले प्रभाव ने पृथ्वी को अपनी धुरी पर झुका दिया।

यह तापमान में पृथ्वी के मौसमी बदलाव का कारण बनता है। इसके अलावा, चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण महासागरों के ज्वार का कारण बनता है, पृथ्वी की गति को कम करता है (जो जलवायु को स्थिर करने में मदद करता है) और पृथ्वी के स्पिन को धीमा कर रहा है।

पृथ्वी अपनी धुरी पर एक चक्कर 12 घंटे में पूरा करती थी, लेकिन अब इसमें 24 घंटे लगते हैं।

2. प्लूटो

pluto

2006 से पहले हमारे सौर मंडल में आठ नहीं, बल्कि नौ ग्रह माने जाते थे। 9वां प्लूटो के रूप में गिना जाने वाला और हमारे सूर्य से सबसे दूर परिक्रमा करने वाला पिंड है।

हालाँकि 2006 में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने घोषणा की कि प्लूटो को एक ग्रह के रूप में नहीं गिना जाएगा। क्योंकि यह पृथ्वी के चंद्रमा से छोटा है।

यह नेपच्यून से परे क्षुद्रग्रहों की एक बेल्ट में परिक्रमा करता है और इसके पास पर्याप्त गुरुत्वाकर्षण नहीं है। इसलिए इसे एक बौना ग्रह माना जाएगा।

ग्रह एक तारे की परिक्रमा करने वाले पिंड हैं। ग्रह गैस और धूल की एक डिस्क में कणों से बनते हैं, जब वे तारे की परिक्रमा करते हैं तो आपस में टकराते और चिपके रहते हैं।

तारे के निकटतम ग्रह चट्टानी होते हैं क्योंकि तारे की हवा उनकी गैसों को उड़ा देती है और क्योंकि वे तारे के गुरुत्वाकर्षण द्वारा आकर्षित भारी सामग्री से बने होते हैं।

सूर्य की प्रणाली में, पृथ्वी चार चट्टानी ग्रहों में से एक है। लेकिन एक अलग प्रकार का ग्रह है, जिसमें कठोर और पिघली हुई परतें हैं।

The Late Heavy Bombardment

प्रारंभ में बनी पृथ्वी पर लगातार अंतरिक्ष में फैले मलबे की बारिश होती रहा। उसे इन पदार्थों के हमले के लगातार खतरे का सामना करना पड़ा।

लगभग 4.5 से 3.8 अरब साल पहले अविकसित ग्रह और छोटे क्षुद्रग्रह बड़ी मात्रा में पृथ्वी से टकराए। जिससे उनकी सतह खराब हो गई। यह घटना लेट हैवी बॉम्बार्डमेंट के रूप में जानी जाती है।

जब बाहरी ग्रहों का निर्माण हुआ था, तब उन्होंने बड़ी संख्या में क्षुद्रग्रहों को आंतरिक सौर मंडल में भेजा। इस घटना ने सौर मंडल के निर्माण के 500-600 मिलियन वर्ष के बाद और लगभग 4 अरब साल पहले हुई लेट हैवी बॉम्बार्डमेंट को जन्म दिया था।

भारी बमबारी की यह अवधि कई सौ मिलियन वर्षों तक चली और यह चंद्रमा और बुध जैसे आंतरिक सौर मंडल के पिंडों पर अभी भी दिखाई दी जा सकती है।

पृथ्वी पर जीवन का सबसे पुराना ज्ञात प्रमाण 3.8 अरब साल पहले का है, जो लेट हैवी बॉम्बार्डमेंट की समाप्ति के लगभग तुरंत बाद की घटना है।

लेट हैवी बॉम्बार्डमेंट को सौरमंडल के विकास का एक अहम हिस्सा माना जाता है। सौर मंडल के विकास के दौरान, धूमकेतुओं को आंतरिक सौर मंडल से बाहर निकाल दिया गया था।

जो विशाल ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण के कारण हुआ था। यह ऊर्ट क्लाउड बनाने के लिए हजारों AU (1AU=सूर्य से पृथ्वी की दूरी) दूर जाकर स्थित हो गए।

ऊर्ट क्लाउड सूर्य के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव की सबसे दूर की सीमा पर पदार्थों से बना एक गोलाकार बाहरी झुंड है, जो लगातार सूर्य की परिक्रमा करता है।

इसके लगभग 800 मिलियन वर्षों के बाद, गांगेय ज्वार-भाटे, गुजरते तारों और विशाल आणविक बादलों के कारण उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण व्यवधान ने धूमकेतुओं को आंतरिक सौर मंडल में भेजकर ऊर्ट क्लाउड को समाप्त करना शुरू कर दिया था।

ऐसा प्रतीत होता है कि बाहरी सौर मंडल का विकास भी सौर पवन, सूक्ष्म उल्कापिंडों और तारे के बीच के माध्यम के तटस्थ घटकों से अंतरिक्ष अपक्षय से प्रभावित हुआ है।

लेट हैवी बॉम्बार्डमेंट के बाद क्षुद्रग्रह बेल्ट का विकास मुख्य रूप से टकरावों द्वारा नियंत्रित किया गया था।

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निष्कर्ष:

तो मित्रों ये था हमारे सौरमंडल की उत्पत्ति कैसे हुई, हम उम्मीद करते है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको हमारा solar सिस्टम कैसे बना था.

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